Hindi Quote in Poem by aakanksha

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मैं सबका सहारा बनी,
पर खुद को संभाल न पाई।
सबकी चुप्पियाँ सुनी मैंने,
पर अपनी आवाज़ दबाई।
मैं दर्द की भाषा जानती थी,
इसलिए हर टूटे दिल की कहानी थी,
पर किसी ने ये नहीं पूछा कभी,
मेरे अंदर भी एक परेशानी थी।
मैंने लोगों को रास्ते दिए,
पर अपनी मंज़िल खोती गई,
मैं सबको रोशनी देती रही,
और खुद ही अंधेरे में सोती गई।
अब सीख लिया है धीरे-धीरे,
कि हर बोझ मेरा नहीं होता,
मैं सहारा हूँ, कोई मंज़िल नहीं,
हर सफ़र मुझ पर नहीं रोता।
अब मैं खुद को भी सुनती हूँ,
खुद को भी थोड़ा-सा थामती हूँ,
क्योंकि जो खुद को बचा ले पहले,
वही दूसरों को सच में संभाल पाता है। 🌙

Hindi Poem by aakanksha : 112015414
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