दोहे
भोला भाला मन कहे,
विनती सुनो अपार।
करते मन से याचना,
हमको प्रभु दो तार ।।
खानपान का सुख मिले,
कभी न हूं लाचार ।
इतना देना प्रभु हमें,
देना शक्ति अपार।।
रोटी हमको चाहिए,
बचती उससे जान।
रखने को डिब्बा मिले,
नहीं चाहिए शान।।
डॉ भावना शुक्ल 🙏🙏
दिन मंगलवार
चित्र आधारित
सुनो पलायन मत करो,
बुलाओ नहीं काल।
हारो नही तुम हिम्मत,
हो परिवारिक ढाल।।
जागेगी कभी किस्मत,
है तेरा पैगाम।
जिन्दगी को तुम समझो ,
जीवन तेरे नाम।।
डॉ भावना शुक्ल 🙏🙏