रघुनाथ अनाथ के नाथ जो हैं।
करुणा करिहे अरु धाय प्रभु।
मग में जग जाल है त्रास भयो।
अब आप उबारो आय प्रभो।
जग जंगम जंग जहान भयो।
रग रोग वियोग पच्छाह भई।
मन मार गयो संसारण में।
तन तंग भुजंग शरीर लई।
जग माही सुनेन तुम दुःख हरण।
हम सम पापिन को तार रहेओ।
अब आओ कृपानिधि देर भई।
हम डूब रहे है बचाई लिओ।
-Anand Tripathi