कबीरदास जी के दोहे
कबीरा हमारा कोई नहीं, हम काहू के नाहिं।
पारै पहुंचे नाव ज्यौ, मीलके बिछुरी जाह।।
साहेब बंदगी 🙏
भावार्थ - संत कबीर साहेब जी इस दुनियां को एक नाव बताते हुऐ कहते हैं कि - इस संसार रूपी नाव में हमारा कोई नहीं और न ही हम किसी के है। जैसे ही नाव किनारे पर पहुंचेगी हम सब बिछड़ जायेंगे। इस संसार रूपी नाव में हमारा अपना कोई भी नहीं हैं,और न ही हम किसी के अपने हैं। कोई भी इस संसार में सदा एक साथ नहीं रह सकता । एक न एक दिन सबको अलग होना ही पड़ता हैं।