कथा कहानी में मिलें ,
अब अनुबंधित सत्य .
सहज हुआ मिथ्यापना ,
आतंकित है कथ्य .|१|
प्रायोजित आलोचना ,
आयोजित अनुबंध .
संयोजित संगोष्ठी ,
आमंत्रित संबन्ध .|२|
दौर नया कविता नई ,
नए नए प्रतिमान .
नई पौध पर टिक रहा ,
नूतन राग विहान |३|
आलोचक चारण हुए ,
आलोचना प्रलाप .
आंदोलित रचना हुई ,
आतंकित पदचाप |४|
© डॉ जयशंकर शुक्ल