इज़ाज़त...
आज मुझे ये शाम सजाने की इज़ाज़त दे दो
दिल-ओ-जान तुम पर लुटानेकी इज़ाज़त दे दो
मिले जो दर्द या मिले सुकून - कुबूल है हमें
कभी रिहा ना हो पाए वैसे क़ैद होनेकी इज़ाज़त दे दो
कोई ख्वाब सजाने की इज़ाज़त दे दो
अब तो मुझे अपना बनाने की इज़ाज़त दे दो
अब भी चुभा करते है तेरे इश्क़ के ज़ख़्म
इस वीरान से गुलको खिलाने की इज़ाज़त दे दो
कर्ज उतारने की मेरे हमदम हमें इज़ाज़त दे दो
वफ़ा का फर्ज निभाने की अब तो इज़ाज़त दे दो
लूंटती हुई दुनिया की तमन्नाओ की कसम
मुकद्दर अपना बनाने की बस आज इज़ाज़त दे दो
टूटती साँस बचाले अपनी ये इज़ाज़त दे दो
जिस्मसे रूह का रास्ता बना दे ये इज़ाज़त दे दो
बयां करने है जो है दफ़न जज्बात मेरे
अब तो हमें जिन्दा रहने की आखिरी इज़ाज़त दे दो