जिंदगी में एक समय ऐसा आता है जब कोई अपना ध्येय नहीं होता, लगने लगता है कि अब किसी को, समाज को हमारी जरूरत ही नहीं है I सुबह उठने के बाद क्या करे? समस्या होती है I एक निराशा जीवन में आने लगती है I
अवकाश प्राप्त लोगों की स्थिति विचित्र है न इधर न उधर I