English Quote in Poem by Hiral Zala

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* में बस उसका हाथ थाम चल दिया............ *

एक रोज़,एक शाम , वक्त की फिज़ा कुछ यूं पलट गई
होना था कुछ और , लेकिन मौसम की दास्तान मुझे ही बहा गई,
महज़ ये दो पल की मुलाकात, मेरे दिल में शमा गई
बस वो आई और मुझे खुदसे ही चुरा गई।

आज भी सोचता हूं , काश कह पाता उससे उसी पल ,
की तेरी अदाओं ओ पर ये दिल दीवाना हो गया ,
तुझे देखा और में उसी वक्त तुम्हारा हो गया,
तेरी सादगी में मेरा इरादा तुझे पाने का हो गया।

मिली थी वो शिव मंदिर में, हाथ जोड़ कुछ मांग रही थी
में तकता ही रहा उसे , प्रार्थना कर वो अचानक मेरे पास आ गई
में मुस्कान के साथ उसे देखता रहा , वो मेरा हाथ खींच हाथ में प्रसाद दे गई
मुझसे मेरी नींद नहीं , साथ साथ मेरा मेहबूब भी चुरा गई

कहा ढूंढूं में अब अपने इन मेहबूब को
महज़ एक पल की मुलाकात में जीवन भर का इंतजार दे गई
फिर खड़ा रहा में दूसरे दिन उसी शिव मंदिर की चोखट
धूप के इस मौसम में सुबह से शाम हो गई
ना दिखी मुझे वो , ओर मेरे दिल को बेसुकुन होने का मोहताज कर गई

एक दिन, दस दिन , ऐसे पूरा एक माह बीत गई
मुझे बस एक बार मिल , उसकी नजरों का कायल बना गई
दिन में वो , हर शाम वो ,हर रात वो ,
मुझे प्रेम का वो रोग लगा गई
बिना बताए वो मुझसे बोहोत दूर हो कर मुझे रोना सीखा गई ।

एक रोज हाथ जोड़ , उस महादेव से मेने उसे मांग ही लिया
हिम्मत कर उस भगवान को अपने दिल का हाल बता ही दिया
आखें खोल कर मुड़ रहा था मैं, तो मुझे मेरा सुकून मिल पाया
थोड़ा खुश हो कर फिर जब में जमीन आया , तो देख पाया उस होनी को , जो मुझे रुला गई


उसकी आंखे बंध और हाथ में था एक लकड़ी का साथ ,
जिसे थाम वो धीरे धीरे ऊपर आ रही थी,
ओर उससे देख मेरे रोम रोम का हर पिघलता आशु जमीन पर जा गिर रहा था,
उसका पैर मंदिर की सीढ़ी से जा टकराया ,
ओर में भागा और उसको संभाल मेरे होश में होश आया

डर कर वो सहम गई , मेने उसकी लकड़ी को अपने हाथ में लिया और उसका हाथ पकड़ उसे मंदिर तक ले आया
हाथ जोड़, उसने फिर भगवान से कुछ मांगा
में बस उसे निहारता रहा, फिर वो जाने को उतावली हो गई

निकल ने को बेताब थी, इस लिए अपने आप चली
में उसकी ओर भागा और हिम्मत से उसको कहा
" रुको , मैं तुम्हे तुम्हारी मंजिल तक पोहचाता हूं "
उसका हाथ पकड़ में चल दिया , सालो साल तक ,
जन्मों जन्मों तक, में बस उसका हाथ थाम चल दिया............


- Hiral Zala


*LOVE IS NEVER CHANGE IN ANY CONDITION*

English Poem by Hiral Zala : 111845427
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