मैं वक्त हूं अमिट छाप छोड़ जाऊंगा
दरिया नहीं हूं की पीछे हट जाऊंगा
तुम कर लेना कोशिश भूलने की हमें
मैं बन के हवा सांसों में उतर जाऊंगा
पत्ता नहीं हूं की पतझड़ में गिर जाऊंगा
पेड़ हूं में फिर से हरा हो जाऊंगा
मैं तूफान हूं मेरी अपनी पहचान है
खफा हुआ तो तबाह कर जाऊंगा
मैं रखता हूं मुट्ठियों में आसमान
और रौंदकर जमीं चलता हूं
एक जज़्बा एक जुनूं है मुझ में
है हिम्मत हर दौर से गुजर जाऊंगा
#shilpapandya