तेभ्योsखिलेभ्यो योगिभ्य: पितृभ्यो यतमानस:।
नमो नमो नमस्ते मे प्रसीदन्तु स्वधाभुज:॥
उन संपूर्ण योगी पितरों को मैं एकाग्रचित होकर प्रणाम करता हूँ। उन्हें बारंबार नमस्कार है। वे स्वधाभोजी पितर मुझ पर प्रसन्न हों।
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तेभ्यः स्वधा नमः।
तेभ्यः स्वधा नमः।
तेभ्यः स्वधा नमः।
स्वधा स्वधा स्वधा
आज विदा का दिन आया है, हृदय भरा, आंखें कुछ नम हैं।
पितृलोक के सभी स्वजन को करते आज नमन हैं।
हैं हम अकिंचन, और ऋणी हैं, कृतज्ञ भाव मन मे भर के।
रहे सदा उनका प्रशस्त पथ, प्रार्थना हम यह करते।
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