वेद वाणी 7-10-3
अच्छा गिरो मतयो देवयन्तीरग्निं यन्ति द्रविणं भिक्षमाणाः।
सुसन्दृशं सौप्रीकं स्वञ्चं हव्यवाहमरतिं मानुषाणाम्॥ऋग्वेद 7-10-3॥
हम उत्तम गति वाले, तेजस्वी रूप वाले, मनुष्यो के स्वामी, धन प्रदान करने वाले परमेश्वर की अपने ज्ञान से वाणियों के द्वारा मन से स्तुतियां करते है। हमारे द्वारा की गयी मन से स्तुति युक्त हवि प्राप्त कर परमात्मा हमारा कल्याण करते है।
With our knowledge, we praise the Supreme Lord, the Lord of human beings, the giver of wealth, through our words of wisdom. God blesses us by receiving the praising havi from our mind.