शहरोमें बड़ी बड़ी दुकानें थी,
कपडों, खिलौनो और किताबों से भरी...
और मेरे बाबुजी की एक छोटी सी नौकरी,
वो बरसों अपने लिए एक नया कुतॉ नही सिलवा पाए -
पुराना फटता और सिल जाता,
पर कपडे, किताबें, खिलौने-
में जो कुछ भी मांगता मुझे मिल जाता ।
कुछ किस्से है, जो हमेशा के लिए दिल पे दर्ज हो गए
में कभी नही भुल पाउगां कि मेरी खुशीयां खरीदने में मेरे बाबुजी खर्च हो गए ।।।
-Parth Dalvdi