एक परिस्थिति यह है की...
जब कोई व्यक्ति, उसे जिसके प्रति अटूट श्रद्धा हो
उसकी गलती मानने को मन तैयार ही न हो,
तो उसके स्वयं के अस्तित्व और सामर्थ्य पर प्रश्न चिन्ह आता है।
दूजी परिस्थिति यह है की...
जब कोई व्यक्ति, जिसकी स्वयं की गलती हो,
और आपका मन मानने को तैयार ही ना हो,
तो उसके स्वयं का घमंड और अभिमान जन्म लेता है।
दोनों ही परिस्थितियों में उस व्यक्ति का पतन निश्चित ही है।
- बिट्टू श्री दार्शनिक
(आचार्य जिज्ञासु चौहान)
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