मै नारी हूं......
असाधारण कर्मों को करने वाली
मै साधारण सी नारी हूं..........
फूटता जीवन का अंकुर मुझसे,
पृथ्वी पर जीवन की मै धारा हूं।
मै मां भी हूं, बहन भी,बेटी भी,
मै ही जीवन सँगिनी,अर्धांगिनी, मै सहारा हूं।
घर-घर का, इस जग का भरण पोषण करती,
मै पालनहारी हूं..........
असाधारण कर्मों को करने वाली
मै साधारण सी नारी हूं..........
शिक्षा के प्रसार, सभ्यता के विकास ने
मुझे इस युग में नई पहचान दिलाई,
कंधे से कंधा मिलाकर जो चली तो
मेरी दबी प्रतिभा जग के सामने आई,
बसा दया,करूणा,वात्सल्य, स्नेह, लगाव मुझमे,
छुपा दुर्गा,काली,रानी लक्ष्मीबाई,सिंहनी का भाव मुझमे,
चुनौतियों से ना कभी हारी हूं........
असाधारण कर्मों को करने वाली
मै साधारण सी नारी हूं..........
प्रथम शिक्षक, जीवन भर पाठशाला होकर
राष्ट्र के निर्माण में योगदान दिया,
युगों-युगों से कदम-कदम पर हर क्षण मैने औरों के लिये बलिदान दिया,
पुरूषों ने भी मुझे इस पुरूष प्रधान समाज में बराबर का स्थान,सम्मान दिया,
मै हृदय से आभारी हूं.........
असाधारण कर्मों को करने वाली
मै साधारण सी नारी हूं..........
मेरी कुछ पंक्तियां अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर सभी महिलाओं को समर्पित।
मातृशक्ति को शत-शत नमन, अभिनन्दन
सौरभ चौधरी