किसी ओर फर्जी वादे,
किसी ओर दिल की बाते
कही जिस्म की हेरा फेरी है।
लगता है आने वाली तारीख ए फरवरी है।
कही गुलाब किसी के गालों पर अपनी पंखुड़ियां बिखेरता होगा।
कही शराब अपनी शबाब में किसी के जिस्म को उधेरता होगा।
कही तो कोई न कोई होगी ही बदनामी का शिकार।
और कोई किसी के गम में हो जाएगा बीमार।
कही कोई कह देगा कानों में आकर सॉरी यार मैं शादी नही कर सकता।
क्योंकि तू मुझसे उम्र में बड़ी है।
लगता है आने वाली तारीख ए फरवरी है।
कही पर चांद दिखाएगा कोई कही पर हाथ दबाएगा कोई।
कही पर गमगीन शराबी आवाज उठाएगा कोई।
कही पर सख्स तो होगा कोई।
कही पर आंख वो जो जमकर रोई।
कही वादे निभाएंगे।
तुम अगर नही आई तो देख लो हम कूद जायेंगे।
कही पर मौन हो चुका कोई।
उसको दे गया दगा कोई।
कही एक आस है जो जिंदा है।
कभी छोड़ा था किसी ने वो आज भी शर्मिंदा है।
कोई होगा कोई जो खुद से कर लेता बाते।
न जाने क्यों नहीं कटती है ये नापाक सी राते।
लगता है फिजाओं में आज बड़ी सरहरी है।
लगता है आने वाली तारीख ए फरवरी है।
कोई तो है जो इन सबसे परे।
बस अपनी जिंदगी के खातिर दिन रात लड़े।
उसके लिए हर क्षण एक नई तस्करी है।
लगता है आने वाली तारीख ए फरवरी है।
लगता है आने वाली। ........
सुखन वर
आनंद त्रिपाठी।