हर पल बदलते रिश्ते
दोनो पकड़ मजबूत हो,
झुकते नही है ये रिश्ते।
पर झुक जाते कभी,
ख़ुदग़रज़ी वाले रिश्ते।
अपना काम निकाल ही लेते,
स्वार्थी वाले ये रिश्ते।
पर कभी झुकने ना देते,
सच्चाई वाले हर रिश्ते।
बिगड़ी बनाते या ,
बिगड़े हुए को संजोते ये कभी रिश्ते।
समझ ही न पाओगे कि,
क्यों खो जाते कभी रिश्ते।
कभी हाथ पकड़ आगे ले जाएं,
कभी दामन छुड़ाते निःस्वार्थ पर भी रिश्ते।
जो खुशी अपनो से ना मिले,
तो दे जाते कभी वो पराये वाले रिश्ते।
दिल से दुआ निकलती कभी ना टूटे,
अंतर्मन से बंधे है जो रिश्ते।
सही रहते भी झुकना पड़े तो,
तुमसे बचे है वो रिश्ते।
खत्म ना होगा शब्दों का ताना-बाना,
क्यों पल-पल बदलते रिश्ते।
साक्षी✍️