*जय मां शैलपुत्री*
*चौघड़िया*
चौघड़िया में 24 घण्टों को 16 घटियों में बांटां जाता है। एक घटी (घड़ी) लगभग 22 मिनट 20 सैकेन्ड की होती है। एक मुहूर्त में चार घटियां (घड़ियां) ली जाती है। चार घटियों से ही इसका नाम "चौघड़िया" पड़ा है।
इस प्रकार के 8 मुहूर्त दिन में तथा 8 मुहूर्त रात्रि में आते हैं। इसमें प्रत्येक मुहुर्त लगभग 1:30 घण्टे का होता है। यह मुहूर्त निकालने का सबसे आसान तरीका है।
*चौघड़िया का प्रयोग*
✓इस मुहूर्त का प्रयोग, दिन - रात्रि में पूजा का शुभ समय जानने के लिये किया जाता है।
✓विशेष उद्धेश्य के लिये यात्रा का आरम्भ करने के लिये इसका प्रयोग किया जाता है।
✓पारिवारिक समारोह व उत्सव मनाने के लिये भी इसका प्रयोग होने के कारण आज यह विशेष मूहूर्तों की श्रेणी में आ गया है।
*चौघड़िया के शुभ/ अशुभ मुहूर्त*
✓चौघड़िया मुहूर्त में *अमृत, लाभ, शुभ, चर* को *शुभ माना जाता है* तथा *उद्वेग, रोग व काल* को *अशुभ माना जाता है।*
✓ *अमृत* चंद्र से सम्बन्धित है।इस समय में पूजा समारोह करना विशेष शुभता देता है।
✓ *लाभ* का संबंध बुध ग्रह से है। इस समय में क्रय-विक्रय के कार्य करने हेतु प्रयोग किया जाता है। विद्या के कार्यों को आरंभ करने के लिए भी *लाभ* का प्रयोग किया जाता है।
✓ *चर* शुक्र से संबंधित है जबकि *शुभ* बृहस्पति से सम्बन्धित है। गतिशील वस्तुओं को क्रय करने के लिये *चर व शुभ* मुहुर्त को प्रयोग किया जा सकता है। यात्रा आरंभ करने के लिए भी *चर* अच्छा है।
✓ *रोग* यह मंगल से संबंधित है। इस समय में यात्रा आरम्भ करना इसके नाम के अनुसार शुभ नहीं माना जाता है। हालांकि युद्ध क्षेत्र से जुड़े कार्य इसमें किए जा सकते हैं।
✓ *उद्वेग* ये सूर्य से संबंधित है। ज्योतिष में सूर्य के प्रभाव को आमतौर पर अशुभ माना गया है इसीलिए इसे उद्वेग के रूप में चिह्नित किया जाता है। हालांकि, इस चौघड़िया में सरकारी कार्यों को किया जा सकता है।
✓ *काल* इसका संबंध शनि ग्रह से है। शनि एक पापी ग्रह है इसीलिए इसे काल के रूप में चिह्नित किया गया है। काल चौघड़िया के दौरान कोई शुभ कार्य नहीं करना चाहिए। हालांकि, कुछ मामलों में धनोपार्जन हेतु की जाने वाली गतिविधियों के लिए यह लाभदायक सिद्ध हो सकता है।
*ज्योतिषाचार्य डॉ दीपक सिक्का*
*8178337165*
*www.absolutezone.in*
🙏🏻🙏🏻