अनंत ऊर्जा..........
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अनुपयोगी लोहे में जैसे
प्रायः जंग लग जाता है
ठहराव से पानी अशुद्ध
हो सड़ने लग जाता है।
ठहरा पानी दूषित होना
दुर्गंध का विस्तार होता है
जीवन ठहराव से नहीं ये
बल्कि रफ्तार से होता है
मस्तिष्क सक्रिय होकर
सतत गतिमान होता है
स्वस्थ तन मन में पुष्पित
होकर उर्जा वान होता है
अहित कर्मों के सृजन से
फिर मनुष्य दुखी होता है
अनंत ऊर्जा को संचित
कर जीवन सुखी होता है
एम.एल. नत्थानी