उल्फत की आस का बड़ा दिल पर असर रहा,
लेकिन तुम्हारी याद से कम बे खबर रहा।
आखिर मुजे ये होश में लाती रही शराब,
कैदी बना में इस तरहा अहेले नजर रहा।
बिखरे हुवे खयाल को यक जा न कर सके,
मिलना हमारा देख युं ही मुख्तसर रहा ।
तनहा पडे है आजभी दुनिया की भीड में,
साथी रहाना साथ कोइ हमसफर रहा ।
आलम की उल्जनों को बहोत जेलना पडा,
अपना हरइक कदभ जो यहां आंच पर रहा।
तेरी नजर के फासले बढ़ते रहे मगर,
तेरे करम की आस लीये मे उमर भर रहा।
मासूम खयाले यार लीये सदा ढुंढते रहे,
तनहा सफर निबाह बड़ा पुर खतर रहा।
मासूम मोडासवी