फिक्र करो या शक करो
दोनों प्रेम की पराकाष्ठा है
फर्क दोनों में इतना है कि
फिक्र मर्यादा से बंधी है
और शक मर्यादा विहीन है
रास्ते पे गाड़ी हो या जीवन में प्यार....
"अति की क़भी भी गति नहीं होती है "
"गति मर्यादा में जिसकी नहीं रहती
उसमें अच्छी सोच और मत्ती नहीं होती है"
#आर्यवर्त