Hindi Quote in Poem by Rajesh Maheshwari

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सृजन का नया इतिहास


मैं अपनी ही धुन में जा रहा था।
वह अपनी ही धुन में आ रही थी।
नजरें हुईं चार, फिर हुआ प्यार
मैंने उसे और उसने मुझे
सात फेरों के साथ
कर लिया स्वीकार।
जीवन की बगिया में खिल उठे
गेंदा, गुलाब, मोंगरा और हर सिंगार।
मेरे हर काम में अब
वह हाथ बंटाने लगी।
मेरी हर अपूर्णता को
पूर्णता बनाने लगी।
उसके कौशल से
घर की लक्ष्मी
दिन दूनी रात चौगुनी
बढती ही जाती है।
उसके सद्भावों से
उसकी प्रतिष्ठा
ऊपर और ऊपर को
चढती ही जाती है।
मैं अक्सर सोचता हूँ
अगर मेरे देश में हर घर में
चौके चूल्हे की सीमाओं को लांघकर
हर नारी कर्मक्षेत्र में उतर जाए।
तो देश की विकास दर
कभी नही घट पाए।
बस ऊपर और ऊपर को
बढती ही चली जाए।
तब कल्पना में नही
हकीकत में देश हो समृद्ध
बढे उसका मान सम्मान और नाम
रचे सृजन का नया आयाम l

Hindi Poem by Rajesh Maheshwari : 111709237
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