लोग करें याद
जीवन में गरीबी
पैदा करती है अभाव
पनपाती है अपराध और
होता है समाज का अपराधीकरण।
जीवन में अमीरी
पैदा करती है दुव्र्यसन
लिप्त करती है समाज को
जुआ, सट्टा, व्याभिचार
और शराब में।
इसलिये हमारे ग्रंथ कहते हैं:-
धन हो इतना कि
पूरी हो हमारी आवश्यकताएँ।
कभी ना हो
धन का दुरूपयोग।
जीवन हो
परोपकार और जनसेवा से परिपूर्ण।
पाप और पुण्य की तराजू में
पाप हमेशा कम हों।
तन में पवित्रता और
मन में मधुरता हो।
हृदय में प्रभु की भक्ति और
दर्शन की चाह हो।
धर्म कर्म करते हुए ही
पूरी हो जीवन की लीला।
हमारे जाने के बाद
लोगों के दिलो में
बनी रहे सदा हमारी याद।