"02/04/2011..एक अविस्मरणीय दिन/विश्व कप में भारत की जीत...."
सब कुछ आज भी आँखों के सामने है...,ठीक उसी तरह...इस दिन से
कुछ दिन पहले शिरडी,साईं बाबा के दर्शन करने गई थी,अपनी ज़िंदगी में सबकुछ ठीक करने की प्रार्थना करने कि सुना था जब कोई नहीं सुनता तब बाबा सुनते हैं....
02/04/11 उस दिन शनिवार था,मेरा उपवास था,विश्व कप फाईनल था और मेरे 1 साल के भतीजे रुद्र का पहला जन्मदिन था और सुबह भोपाल के एक बड़े और प्रतिष्ठित कॉलेज में यूनिवर्सिटी की टीम की ओर से मेरा इंटरव्यू था,मैं सफेद रंग के सूट में कॉलेज गई,इंटरव्यू अच्छा हुआ...लौटकर आई तो घर में बच्चे के जन्मदिन की पूजा चल रही थी,
दोनों बच्चे मुझे देखकर मौसी,मौसी कहकर मुझसे लिपट गए और घरवालों ने कहा अब तुम्हीं इन्हें सँभालो,बहुत देर से परेशान कर रहे हैं....उसके बाद वो लोग दूसरे मकान में चले गए,जहाँ शाम को बच्चों की पार्टी थी, मैंने थोड़ा बहुत क्रिकेट मैच देखा और फिर मैं भी उस मकान पर गई.. इस बीच मेरे मन में डर था कि कहीं सचिन आउट न हो जाए और बाद में पता चला कि ऐसा ही हुआ था... पार्टी के बाद हम वापस अपने घर लौटे और टीवी पर मैच देखने लगे,मुझे लग रहा था कि भारत जीत जाएगा... मैंने मम्मी से खाने के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि कुछ नहीं है खाने को,तब इस बात पर मैंने उनसे कहा कि पूजा हुई,पार्टी हुई मेरे लिए कुछ क्यों नहीं रखा,मैंने सुबह से कुछ नहीं खाया था...टी वी पर मैच में इंडिया के विकेट गिर रहे थे,मुझे लगा कि जिम्मेदारी उठाकर कप्तान धोनी को बैटिंग के लिए आना चाहिए
हालांकि वो उस नंबर पर नहीं आते थे लेकिन फिर मेरी इच्छा पूरी हुई,धोनी जी बैटिंग के लिए आए और भारत को विश्व कप दिला दिया...और फिर बस पटाखे,शोर शराबा...इस खुशी में मुझे याद नहीं कि फिर मैंने क्या खाया,बनाया..या फिर बस खुशी ही खाकर सो गई...हाँ,बाद में पता चला कि इंटरव्यू में मेरा चयन हो गया था, बहुत खुश थी मैं क्योंकि वहाँ की हर बात बहुत अच्छी थी लेकिन पहले ही दिन मेरी खुशी को नजर लग गई और ना चाहते हुए भी बहुत बेदिल से मुझे नौकरी छोड़ना पड़ा...
प्रांजल,
02/04/21,
10.15A