बद्री नारायण कृपा करो
बद्री नारायण विनती सुनो ।
बद्री नारायण दया करो
बद्री नारायण कृपा करो।
बद्री बाबा तेरे स्वरुपों में समाए हैं त्रिभुवन ।
बद्री बाबा तुमने नख पर धारे है गोवर्धन।
बद्री बाबा तेरे चरणों से निकली हैं गंग धार।
कल कल निनाद करती अविरल जल धार ।
तन पर धारण किए हैं पट पीताम्बर ।
बद्री बाबा के कर में शोभे मुरली अरु बैजयंती माल।
मै ले आई पीले पुष्प और तुलसी दल तथा पीले चन्दन
से शोभित स्वर्ण थाल।
स्वर्ण सिंहासन विराजो मोरे बद्री नारायण बद्री विशाल।
पग पखारन दे मोरे लक्ष्मी नारायण।
फूलों से तेरा करुं श्रृंगार ।
पंजीरी और छप्पन भोग की ले आई थाल।
रुच रुच भोग लगाएं हे बद्री विशाल।
धूप-दीप और नैवेद्य अर्पित करें।
ढोल ढाक झांझर और बजाएं करताल।
नर नारी मगन हो गये और झूमे नाचे दे दे ताल।
मैं तो तेरे दर्शन की प्यासी हूं।
किस विधि मिलूं हे बिहारी मैं तो तेरे दर पर बैठी हूं।
पट खोल मोरे बद्री नारायण , तेरी करुणा और दया
की भूखी हूं। भावों का अभिनन्दन स्वीकार करो नारायण।
अद्भुत तेरे रुप मोरे बद्री नारायण।
रुप छटा बरनि न जाई।
तेरी अपरिमित है प्रभुताई।
कृपा करो हे बद्री विशाल गोसाईं।
आराधना स्वीकार करो हमारी।
कोटि-कोटि प्रणाम स्वीकार करो हमारी।
संसार को उबार दो हे नारायण।
उद्धार करो हे नारायण।
भव बंधन से मुक्त करो हे नारायण।