कभी फुर्सत मिले तो एक बात सोचना.
जब आंखो में आंसू आए तो उसे पोछते हुए मेरे हाथ सोचना.
जन तन्हाई सताए अंधेरे से डर लगे तो मेरी बाहों में बीती हर रात सोचना .
और
आखरी मुलाकात में तो अपने ही घुरूर में थी " तुम "
और
सोचना ही है तो हमारी पहेली मुलाकात सोचना.....