प अक्षर है कितना न्यारा
प्रसव दे पालन पोषण करती माता
प से पति पत्नी पुत्र और पत्नी
और पितामह होते सबके पूज्य
इसी से होता है परिवार हमारा
प से ही बेटी को मिलता पीहर प्यारा
पद प्रतिष्ठा प्रशंसा का होता प्रसार
इनसब के पीछे भाग रहा है संसार
प से ही बनता पुण्य और पाप
पाप किया तो करना है पश्ताचाप
परम पिता परमेश्वर और परमात्मा
इन सब में ध्यान लगाने से
होती है प्रसन्न हमारी आत्मा