चयन करूं कैसे ??
बोलो ना अपने हृदय के किस टुकड़े को
एक नहीं दो नहीं ऐसे ना जाने कितने टुकड़े है ,
जो रोज़ छोटे और छोटे टुकड़ों में खुद ही बदल रहे है
हर उस टुकड़े से उतना ही प्रेम है जितना हृदय से
मुझे अफसोस नहीं है तकलीफ नहीं है
एक खामोशी है जो अब प्रिय है मुझे
बिखरा है तो बिखरा ही रहने दो उस हर टुकड़े को
मेरा ही अक्स दिखाई देता है मुझे हर उस टुकड़े में
नहीं होगा चयन मुझसे मेरे वजूद का कोई हिस्सा
रहने दो उस बिखरा बिखरा .