कबीर साहेब जी की साखी
मन चलतां तन भी चलै, ताते मन को घेर।
तन मन दोऊ बसि करै, होय राई सुमेर।।4।।
मन से ही तन प्रभावित होता है। जब मन किसी विषय से आकर्षित होकर सक्रिय होता है, तो यह तन भी चलायमान हो जाता है, इसलिए सदैव मन को वश में रखना चाहिए। यदि तन और मन दोनों को वश में कर लिया जाए, तो। इस थोड़े-से समय में होने वाली संयम-साधना का परिणाम-लाभ सुमेरु पर्वत के समान पाया जा सकता है।
सत साहेब जी-
👏 સંતોના ચરણોમાં વંદન👏