एक नया सवेरा ।
आज का सवेरा कुछ नया सा था
इस सवेरे में कुछ नशा सा था ।
मुझे समझ नहीं आ रहा ये एहसास क्या था
पर जो भी था, बहोत खूबसूरत था ।
आज का सवेरा कुछ नया सा था,
और मेरा गम कहीं खोया सा था ।
कल तक दबी हुई थी उन अंधेरों के नीचे,
आज भागना चाहती हूं अपने सपनो के पीछे ।
आज के सवेरे मे कुछ जुनून सा था,
खुद के बारेमे सोचने का एक फितूर सा था ।
कल तक डर ने मानो मुझे लीड सा जकड़ा था,
आज मेरी आज़ादी ने एक नया मोड़ पकड़ा था।
आज में जूम रही थी नाच रही थी,
पता नहीं क्यों लेकिन अपने आप ही मुस्कुरा रही थी।
आज का सवेरा कुछ नया सा था,
क्यों कि आज मै अपने आप को पा रही थी ।
आज मैंने अपने आप को पाया,
सबकुछ भुलाकर खुद में खुद को पाया ।
कल तक खुद के लिए सवाल थे बहुत,
आज उन सवालों के जवाबो को पाया ।
- एक महेक
#HitsHeart