माता, कान्हा तेरौ कुंजन में री,जोबन को मांगे दान।
हमें नित जाय राह में पाय
अगारी मारग रोके आय
रिझावे हमको गाय बजाय
दोहा- मारग रोकत आयके,यह तेरौ फरजंद
बंशी अधर बजावतो,नागर नटवर नन्द
बंशी मधुर बजावे मुख से,नई नई तोरे तान... माता
अनौखौ जसोदा तेरौ लाल
पकड़ कुच चूमे मेरे गाल
मरोरी छाती कर दई लाल
दोहा-लाज लगत है कहत में, बड़ी शरम की बात
तेरे नटवर नन्द ने, खूब लगाए हाथ
जो हम कहें कछु बात, हमें वो और दिखावे शान...माता
संग में ग्वाल बाल लै जाय
हमारो लूट लूट दधि खाय
रह्यौ वाय मद जवानी को छाय
दोहा-बड़ौ निडर डरपै नहीं,ऐसौ ढीठ लबार
हम सब नकमानी करीं,ऐसौ परौ पिछार
कंस राजा को नाम लेंय तो, बहुत करे हैरान...माता
लगी फिर कहन यशोदा माय
दऊंगी वाकूं मैं समुझाय
ढ़ूंढ के लाओ नेक बुलाय
दोहा-अब अटकेगौ नहीं,बालक बुद्धि अजान
मारै मोपै जात ना,प्यारो प्राण समान
कहै"शिवराम" तिहारौ अब ये करे नहीं नुकसान
माता कान्हा तेरौ कुंजन में री जोबन को मांगे दान।।