सूरज का प्रकाश:
सात रंगों की किरणें आयीं
हमें जगाने, तुम्हें जगाने,
नभ में प्यारी दौड़ लगाते
धरती का सौन्दर्य जगाते।
सुनहरी धूप हमको देते
वृक्षों का भोजन बनवाते,
अन्न-जल का चक्र बना के
जीवन का चक्र चलाते।
स्नेह-प्यार के साथी बनते
कहीं परावर्तित,
कहीं अपवर्तित,
धुर्वीकरण का गुण दिखलाते।
इन्द्रधनुष भी इनसे बनता
विवर्तन में खोजे जाते,
चाँद-सितारे सबको दिखाते
हमसे मिलने हर दिन आते।
* महेश रौतेला