यह जिंदगी तेरी रहमत का खजाना है।
यह तन मन तेरे दीदार का दीवाना है।
तू ही तो रखवाला है सबका मेरे मौला।
तेरे कदमों में एक दिन सिमट जाना है।
इंसा कितना भी क्यों न अभिमान करे।
तेरी ख़िदमत एक दिन सबको जाना है।
क्या राजा क्या रंक चाहे वो जोगी हो।
कोई पहले तो किसी को बाद में आना है।
न कोई शिकवा है न कोई गिला तुझसे।
इल्तिज़ा इतनी तेरे साये से लिपट जाना है।
-Arjun Allahabadi