न मैं पतंग हूँ
न डोर हो तुम
मैं हूँ सफ़ेद कागज़
मेरा रंग हो तुम
उम्मीद की उड़ान भरनी है
ज़मीं से बस ज़रा सा उठना है
हलकी सी हवा हूँ मैं
मेरी तरंग हो तुम
जब तक हौसला रहेगा
हम तैरेंगे आसमान में
गिरने का डर क्यों?
मेरे संग हो तुम
सब कुछ मिट्टी होना है
ख़त्म तो सब कुछ होना है
मैं ज़िंदा मिट्टी सी हूँ
मेरा सोंधी अंग हो तुम
--निर्मोही