"विदाई की घड़ी सेकेंडरी स्कूल से"
अजीब सी खुशी हम सबके चेहरों पर छलक आई थी,
बिदाई की फेयरवेल पार्टी का नशा, तन मन छाया था।
दोस्तोंके साथ सेकेंडरी स्कूल में हंसी खुशीसे गुजरे वो दिन
बड़े नसीब हमारे, पिता समान गुरुजनों को हमने पाया था
दिन ढल रहा था, और अब ग्रुप फोटो की बारी आई,
चाहकर भी, हम सबके चेहरे पर हंसी तक ना आई,
हमेशा के लिए बिछड़ने की घड़ी अब दिलों पर छाई।
आंखें नम थी हम सबकी दोस्तों के दिलों में उदासी छाई,
गुरुजनों की पलकें भी, हमारे प्यार से अश्क में नहाई थी।
फिर ना मिले कभी एक साथ हम सब दोस्त यार,
गुरुजनों ने भी अलविदा कहते स्वर्ग सिधार गए।
गुजर गए वो लम्हे, मगर यादें अभी भी दिलों में समाए,
जवानी खत्म हो गई "मित्र"और बालों में सफेदी छाए।
{दिनांक:-14,02,1991 कक्षा दसवीं की परीक्षा के पहले स्कूल में बिदाई (फेयरवेल पार्टी) समारोह की याद में ये रचना अर्पित}
✍️ मनिष कुमार "मित्र" 🙏