मुझे पसंद नहीं है
भानुमती ने अपने बेटे को आवाज लगाई बेटे कुमार आज़ कहीं जाना नहीं तुम आज तुम्हें लड़की वाले देखने आने वाले हैं मगर कुमार का एक जवाब रहता था मम्मी पापा मुझे ऐ लड़की पसंद नहीं है
भानुमती और प्रमुखभाई का एक लौटा बेटा था कुमार उनको शादी के चार साल के बाद पैदा हुआं था कुमार, पढ़ने लिखने बहुत ही होशियार था कुमार, देखने जाएं तो कुमार को कोई तकलीफ़ नहीं थी, कुमार मां बाप की हर बात को मानता था शादी के अलावा मगर एक बात तो है कि बच्चे बड़े हो जाते हैं तो मां बाप की फ़िक्र दुगनी हो जाती है
कुमार को मां बाप ने बहुत सी लड़कियां बताई गई है मगर कुमार एक ही बात कहता था मम्मी पापा मुझे ऐ लड़की पसंद नहीं है यही सुन सुनकर एक दिन भानुमती और प्रमुखभाई गुस्सा हो गए कुमार के उपर और कहने लगे कुमार तुम्हें शादी नहीं करना है क्या
ऐ सुनकर कुमार बोला पापा आपको ऐसा किसने कहा है कि मुझे शादी नहीं करना है, कुमार की मम्मी बोली तुम बताओ अपनी पसंद की लड़की हम तुम्हारी शादी उसी से हीं कराएंगे
ऐ सुनकर कुमार ख़ुश हो गया और बोला मम्मी मुझे रूपमती पसंद है और मुझे रूपमती से ही शादी करना है और वो भी मुझसे शादी करना चाहती है
रूपमती का नाम सुनकर मां बाप गुस्से हों गए कुमार के उपर,बेटा तुम्हें यहीं लड़की पसंद आई, तु कितना गोरा और वो कितनी श्याम है, और सही बात है रूपमती बहुत ही श्याम थी और कुमार बहुत ही खूबसूरत था
भानुमती और प्रमुखभाई कुमार की खुशी की आगे झुक गए, और कुमार और रूपमती की शादी करा दी बेटा खुश हैं तो मां बाप भी खुश रहने लगे
फ़िर करीब एक साल के बाद रूपमती को जुड़वां बच्चे हुए बहुत ही सुंदर एक लड़का और एक लड़की, भानुमती और प्रमुखभाई बहुत ही खुश हों गए, भानुमती और प्रमुखभाई आपस में कहने लगे जो भी होता है अच्छा हीं होता है, हमें काले गोरे का भेदभाव नहीं रखना चाहिए और फ़िर दोनों हंसने लगे ।।
नरेन्द्र परमार " तन्हा "
ऐ कहानी काल्पनिक है इसे वास्तविक जीवन से कोई लेना देना नहीं है ।।