पटल के सभी रचनाकारों को मेरा नमन🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻
सत्य के मैंने उकेरे तीर हैं कुछ,
कुछ तो सरस हैं
मगर गंभीर हैं कुछ।
कुछ तो करुणा से भरे
पर लगे बेनीर हैं कुछ।
कुछ तो दौलत की नदी में हैं नहाए
पर लगे कि नंगीसीर हैं कुछ।
कुछ उमंगों से भरे
पर नयन का नीर हैं कुछ।
कुछ समर्पण शकुन्तला सा
पर द्रुपद का चीर हैं कुछ।
कुछ पगे हैं स्वप्ना रस में
नयन खुले तो पीर है कुछ।
शब्द भेदी बाण छोड़े तो बहुत
पर लगा बेतीर हैं कुछ।
पूनम देवी
लहरपुर ( सीतापुर)