आप प्रेम करते हो, पर सफल नहीं हो पाता, पनप नहीं पाता विश्वास, किन्तु वो हुआ ताकि आप सीख सके प्रेम!.. उससे मिली पीड़ा आपको वास्तविक प्रेम में हो जाने तक के सफ़र के लिए तैयार करती है, कुछ भी अकारण नहीं वो प्रेम भी हुआ वास्तविक प्रेम को समझाने के लिए...।।।