बेखुदी में बढ़ती नजदीकियां हर पल नजर आती रही,
मेरी तनहाई में बढ़ती दूरियां खुदा बन नजर आती रही,
माशिहा क्या बनता उसके अरमानों से बढ़ते ख्वाहिश में,
फरिश्ता एक उड़ान ले कर उसके इश्क़ का पैमाना बन फिसलती रही।
ताउम्र मेरे हिस्से की साँस मेरे सीने से लगकर लिपट कर चल रही,
ये बदन की हर खुशबू तेरे जिस्म की हवाओं से गुलमिलकर लहरती रही।
DEAR ZINDAGI 🤗🙃