आज हर तरफ महफ़िल शांत नजर आई है,
जाने क्यों इन लोगो में उदासी सी छाई है।
हर पल इन राहों पर एक धुंधली सी परछाई है,
जाने इस दुनिया में दुखो की बारिश आई हैं।
कोरॉना कि महामारी शवो कि बाढ़ लाई है,
जाने यमराज ने कोई हरीफाई सी चलाई है।
पाठशाला कि जगह एक स्मार्ट फोन ने बनाई है,
जाने क्यों पुस्तकों को धूल खाने कि बारी आई है।
आज सब लोगो में तनाव कि लकीर खींच आई है,
जाने क्यों हम सबकी आंख भर आईं है,
फिर भी महफ़िल सजाने कि एक उम्मीद लगाई है,
क्योंकि काली रात के बाद हसीन सुबह की प्रथा चली आई है।