# आज की प्रतियोगिता "
# विषय .अमंगल "
# कविता ***
गणपति अमंगल को ,मंगल में बदलते ।
खाली झोली को ,पल में भरते ।।
धर में रिद्धी सिद्धी ,हमेशा लाते ।
सुख समृद्धि बिन ,बुलाये लाते ।।
भक्तों का नित ,कल्याण करते ।
अपनी करुणा अमी ,सदा बरसाते ।।
बिन मांगे सब,कुछ दें देंते ।
खुशहाली जीवन ,में पल में लाते ।।
इनके जैसा उदार ,देव न कोई दिखे ।
इसलिए तो गजानंद ,कहलाते ।।
-Brijmohan Rana