My Painful Poem...!!!
आज एक ही छत के नीचे
बाप-बेटा दादा-पोता है
न चैन से कोई जगता है
ना सुकुँ की नीँद सोता है
आदमी-आदमी दुश्मन
रिश्ते नज़र का धोखा है
पास आने से कतराते हैं
दूर रहने में ही भरोसा है
ग़ज़ब बलिहारी हरि कि
दौलत से न कुछ होता हैं
कर लें रंक की सेवा बंदे
रब ने दिया तूझे मौक़ा है
कब पसताएगा सब यही
छोड़ जाएगा यही होता हैं
सफल जीवन ही सार्थक
बलिदान ही मोक्ष दैता है
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