कभी मेरी हजारों बातों के साथ,
मेरी खामोशी,
को भी सुन लिया कर,
हर बात शब्द में जिक्र करना,
ठीक नहीं...
कभी मेरी धड़कन के साथ,
चलते तेरे,
नाम को भी महसूस किया कर,
हर बार जोर से बुलाना,
ठीक नहीं...
कभी तु मुझे मेरी तरह यूहीं,
बंध आंखो,
से ही देख लिया कर,
हर बार सामने आना ,
ठीक नहीं...
कभी मेरे पास बैठ कर,
मुझे टूटने,
से पहले ही संभाल लिया कर,
हर बार मेरा यूं बिखरना,
ठीक नहीं...
कभी तू भी ये जता लिया कर,
की "पानी",
हूं में तेरे लिए, मेरे लिए जिया कर,
हर बार मेरा ही बताना ,
ठीक नहीं...
यूं तो सब ठीक हैं,
पर कभी,
मुझे गले लगा लिया कर,
हर बार तड़पाना,
ठीक नहीं...
हीमाश्री...
"राधुं"
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