अनोखा व्यक्तित्व
मुंबई महानगर के कांदिवली में एक प्राचीन मंदिर के परिसर में स्थित बहुत पुराने बरगद के वृक्ष के नीचे मदन गोपाल नामक एक लडका प्रतिदिन बैठता था। वह अपने सामने एक बर्तन रख देता था और स्वयं दिनभर पुस्तकांे के अध्ययन में व्यस्त रहता था। वह किसी से भिक्षा नही मांगता था, परंतु जो कोई भी स्वेच्छा पूर्वक उसके पात्र में धन डाल देते थे उसे वह स्वीकार कर लेता था। उसका व्यवहार बडा विचित्र था क्योंकि वह ना किसी से बात करता था और ना ही किसी से भिक्षा मांगता था। उसके इस अनोखे व्यवहार को एक सज्जन रामलाल जो कि प्रतिदिन मंदिर दर्षन हेतु आया करते थे, देखा करते थे। एक दिन उनसे रहा नही गया और उन्होंने मदन गोपाल से पूछा ही लिया कि तुम्हारे ऐसे व्यवहार का क्या कारण है ?
मदन गोपाल ने विनम्रतापूर्वक बताया कि वह भिखारी नही है क्योंकि भिक्षा मांगना एक कर्ज है जिसे कभी ना कभी किसी ना किसी रूप में वापिस चुकाना पडता है। मुझे स्वेच्छापूर्वक मिले धन का अगर उपयोग नही करूंगा तो वह लक्ष्मी जी का अपमान होगा इसलिये उसे स्वीकार करके उससे अपना गुजारा करता हूँ। उसकी बातें सुनकर रामलाल को आष्चर्य हुआ और उन्होंने उससे कहा कि तुम नौकरी क्यों नही करते हो ? मदन गोपाल विनम्रतापूर्वक बोला कि मैं पढा लिखा हूँ परंतु मेरे बहुत प्रयास के बाद भी मुझे कही नौकरी नही मिली इसलिये विवश होकर यहाँ पर बैठता हूँ।
यह सुनकर उन रामलाल गंभीर हो गये और उन्होेंने जहाँ वह कार्यरत थे, वहाँ के मालिक को यह वृत्तांत बताया और मदन गोपाल को नौकरी दिलवा दी। वह पापड उत्पादन का एक उद्योग था। धीरे धीरे मदन गोपाल ने पापड की गुणवत्ता पहचानने में अपने आप को पारंगत कर लिया और वह पापड को चखकर उसकी गुणवत्ता के बारे में बता देता था। उसकी इस कार्यक्षमता के कारण पापड उत्पादन की गुणवत्ता में बहुत सुधार आ गया जिससे बाजार में वहाँ के पापड की मांग बहुत बढ गयी। इससे उस पापड उद्योग के मालिक ने खुष होकर उसे उत्पादन प्रबंधक के पद पर पदोन्नत कर दिया गया।
मदन गोपाल अपनी कडी मेहनत, ईमानदारी एवं कर्तव्य निष्ठा के कारण क्रमषः तरक्की पाता गया और एक दिन उस कंपनी के सर्वोच्च पद पर पहुँच गया। वह उस व्यक्ति को कभी नही भूला जिसने उसे नौकरी दिलाने में सहायता की थी और वह आज भी उसके प्रति आभारी था। अब वह सुखी, समृद्ध एवं शांतिपूर्वक जीवन व्यतीत कर रहा था। उस उद्योग के मालिक अपने मित्रों एवं परिचितों को कहते थे कि मदन गोपाल का जीवन एक उदाहरण के समान है, यदि व्यक्ति में लालसा हो और वह स्वाभिमान के साथ जीने का दृढ निश्चय रखता हो तो एक ना एक दिन अपनी मेहनत, परिश्रम एवं ईमानदारी से सफल होकर दूसरों के लिये प्रेरणा स्त्रोत बन सकता है।