सुहाग
श्रेया के पति सीतेश को गुटखे का शौक था।रातदिन उसके मुह मे गुटखा भरा रहता।इस शौक की वजह से उसे कैंसर हो गया।
इलाज के लिए लाखों रुपये चाहिए थे।जब जमापूँजी खत्म हो गई,तब श्रेया ने रिश्तेदारो परिचितों से मदद मॉगी।एक दो तैयार हुए,लेकिन मदद के बदले वे श्रेया को पा लेना चाहते थे।सुहाग की सलामती के लिए न चाहते हुए भी उसे समझोता करना पडा।
अपने को दाव पर लगाकर,श्रेया अपना सुहाग बचाने मे सफल हो गई।
ठीक होने पर पति बोला",मेरे इलाज मे लाखो रुपए लगे होगे।इतना पैसा कहॉ से आया?"
"छोडो।तुम ठीक हो गये औऱ कया चाहिए"
पर पति नही माना औऱ उसे सच बताना पडा।
"बदचलन--नीच--कुलटा
जिस पति की जान बचाने के लिए श्रेया ने खुद को बेच डाला था,उस पति ने जान बच जाने पर उसे त्याग दिया था।