द्रौपदी-आत्मा की शक्ति
द्रौपदी निष्ठुर न थी
आत्मा की शक्ति थी,
महायुद्ध के तह में बैठ
अंधकार का उत्तर थी।
महायुद्ध से पहले
महायुद्ध के मध्य
बीमार मानसिकता के विरुद्ध खड़ी हो,
दुष्टता को ललकारती
संघर्ष का बीज थी।
दूषित था जिधर मन
उसके विरुद्ध खड़ी वह,
नायिका बनी रही।
सहस्र मुद्राओं में कटा-बँटा मनुष्य
महायुद्ध में स्वाहा हो,
इतिहास की पूँजी बन गया।
कुछ तो निकला था तथ्य
जो भविष्य को सींच गया
(गीता के रूप में पूजा गया)।
द्रौपदी निष्ठुर न थी
आत्मा की शक्ति थी,
जो मनुष्य की कथा कहते-कहते
बहुत दूर निकल पड़ी थी।
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*महेश रौतेला