तु चुप क्यू है ???
बर्बाद हो रही है तेरी बनाई धरा; फिर भी तु चुप क्यूं है ?
अब तो जल के साथ, हवा भी प्रदूषित होने लगी; फिर भी तु चुप क्यूं है ?
अनाज, सब्जियां, फल, फूल, घी, तेल, दूध में है मिलावट; फिर भी तु चुप क्यूं है ?
इंसान बन गया है हैवान, हिंसा, बलात्कार हो रहे है; फिर भी तु चुप क्यूं है ?
नेता, अभिनेता, पंडित, मौलवी बन गए है सौदागर; फिर भी तु चुप क्यूं है ?
जवां जिस्म बेचें जाते है बाजारों में, यह देख कर भी तु चुप क्यूं है ?
एक बार आके बता जा यह तेरी सृष्टि का हाल देख जा; जानना चाहती हूं, तु चुप क्यूं है ?
Armin Dutia Motashaw