हमें कोई न समझे ये और बात है।
आपने कुछ तो समझा पागल ही सही
ये और बात है।।
सजाए थे सपने कुछ ज़िन्दगी के।
पूरे न हुए ये और बात है।।
बदनसीब थे ये तो मालूम था।
बदल गया पूरा ही नसीब
ये और बात है।।
ज़िन्दगी क्या है समझी नहीं "निमिषा"
फिर भी जीती रही ये और बात है।।
~✍️© निमिषा~