My New Poem ....!!!!
तालाब में डुबकी लगाकर
पानी में छपछपाता
टायरों की गाड़ियों में
दुनिया को दुनिया दिखाता
रास्ते के पत्थरों को पैरों
की ठोकरों से
रास्ता ऐसा बताता रास्ते से
घर तक लाता
दोस्तों से रुठ कर दूर जाता अगले
ही पल गले लगाता
माँ की मीठी दाँट धौल हंसते हंसते
ठंडे कलेजे पी जाता
जब मिट्टी से नहा घूँटनीं लोही-लूहाँन
कर शाम खेल से लौटता
शोख_चंचल हाय..!! बचपन
देखता नादानियाँ हूँ
मैं अतीतों के झरोखों की छोटी-सी
कह रहा हूँ कहानियां...!!!
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