मन ही मन हम ठान चुके हैं
भारत को महान बनायेंगे,
जीवन के हर अँधियारे को
चलकर हम मिटायेंगे।
रुग्ण हुए लोगों से आगे
झंडा हम फहरायेंगे,
गंगा-यमुना की धाराओं से
मन को मधुर बनायेंगे।
समर सब हम जीतेंगे
भुवन को समझायेंगे,
पर्वत शिखर से ऊँचे उठ ,
हम भारत का रक्त दिखायेंगे।
सूख चुके जो, बुझने को हैं
वहाँ आशा दीप जलायेंगे,
भारत के स्वर में रहकर
अमर छाप बन जायेंगे।
** महेश रौतेला