मैं तो सपना हूँ
मैं तो सपना हूँ
नींद टूटते ही
उड़ जाऊँगा।
मैं तो कथा हूँ
सुनते-सुनते
अद्भुत हो जाऊँगा।
मैं तो स्नेह हूँ
चलते-चलते
आशीर्वाद बन जाऊँगा।
मैं तो चहल-पहल हूँ
दौड़ते-दौड़ते
शान्त हो जाऊँगा।
मैं तो बीता क्षण हूँ
आगे जाकर
नींव बन जाऊँगा।
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**महेश रौतेला